भोजपुरी गीत Bhojpuri Song











GAY & Lesbian

GAY & Lesbian

इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई
नर नर संगे, मादा मादा संगे जाई

हाई कोर्ट देले बाटे अइसन एगो फैसला
गे लो के मन बढल लेस्बियन के हौसला
भइया संगे मूंछ वाली भउजी घरे आई
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई

खतम भइल धारा अब तीन सौ सतहत्तर
घूमतारे छूटा अब समलैंगिक सभत्तर
रीना अब बनि जइहें लीना के लुगाई
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई

पछिमे से मिलल बाटे अइसन इंसपिरेशन
अच्छे भइल बढी ना अब ओतना पोपुलेशन
बोअत रहीं बिया बाकि फूल ना फुलाई
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई

इ पछुआ बयार हवे रउरा ना बुझाई
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई
नर नर संगे, मादा मादा संगे जाई
इ आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई



{जुलाई 28, 2007}   www.manojbhawuk.com

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Bhojpuri Poet, Writer, and Film-critic.




बदरी के छतिया के चीरत जहजवा से,  
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.  
लन्दन से लिखऽतानी पतिया पँहुचला के,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.  

दिल्ली से जहाज छूटल फुर्र देना उड़ के,
बीबी बेटा संगे हम देखीं मुड़ मुड़ के.
पर्वत के चोटी लाँघत, बदरी के बीचे,
नीला आसमान ऊपर, महासागर नीचे.
लन्दन पँहुच गइल लड़ते पवनवा से,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.

हीथ्रो एयरपोर्टवा से बहरी निकलते,
लागल कि गल गइनी थोड़ी दूर चलते.
बिजुरी के चकमक में देखनी जे कई जोड़ा,
बतियावें छतियावें जहाँ तहाँ रस्ते.
हाल चाल पूछनी हम अपना करेजवा से,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.

हर्टफोर्डसर पँहुचली सँझिया के बेरवा,
जहाँ बाटे कारखाना, जहाँ बाटे डेरवा.
डेरवा के भीतर एसी, सब सुख बा विदेशी,
चट देना फोन कइली बीबी नईहरवा.
ठकचल बा बंगला विलायती समनवा से,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.

भारत से अफ्रीका, फेरु युके चली अइनी,
रुपया, सिलिंग, डालर, पाउन्ड हम कमइनी.
माईबाप चहलें से हम बनि गइनी,
अपना सपनवा के धूरि में मिलइनी.
बेमन के नाता जुड़ल हमरो मशीनवा से,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.

केहू नाहीं टोवे रामा भावुक के मनवा,
तड़पे मशीन बीचे उनकर परनवा.
गीतकार खातिर कलम, कलाकार खातिर कला,
एकरा समान दोसर कौन सुख होई भला ?
अँसुवन में बहे रोज सपना नयनवा से,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.

हमरा भीतर के कलाकार के मुआवऽताटे,
हमरा भीतर के गीतकार के सुतावऽताटे.
जाने कौना कीमत पे पइसा बनावऽताटे,
पापी पेट हमरा से हाय का करावऽताटे.
तड़पिला रात दिन कवना रे जमनवा से,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.

तोहरा से कहतानी साँचो ए इयरवा,
काहे दूना लागत नईखे इचिको जियरवा.
हमरा के काटे दउड़े सोना के पिंजरवा,
मनवा के खींचऽताटे माई के अँचरवा.
लौट चलीं देश अपना कवनो रे बहनवा से,
अइलीं फिरंगिया के गांवे हो संघतिया.



तोहरा के देखला बरिस दिन भइलें, बरिस दिन भइलें हो,
अइतऽ तऽ करतीं जी भर बात,
पिया हो अइतऽ तऽ करतीं जी भर बात.

हमरा हियरवा के सून रे पिंजरवा में,
तोहरे सुधिया के चिरई चहके-चहके हो.
रतिया सपनवा में तोहरा से मिलनीं तऽ,
मनवा के बगिया लागल महके-महके हो.

आइल फगुनवा तऽ लागल अगनवा हो,
सावनों में जरलीं दिन रात.
पिया हो अइतऽ तऽ करतीं जी भर बात.

कसक करेजवा में होला अधिरतिया के,
सेजिया चुभेला हमके गतरे गतरे हो,
लाल से पीयर भइली हमरी सुरतिया हो,
तोहरी फिकिरिया हमके कुतरे कुतरे हो.

मटिया मिलल जाला सोना के जवनिया हो,
काहे ना बूझेलऽ तू ई बात ?
पिया हो अइतऽ तऽ करतीं जी भर बात.



रतिया भर अँखिया ई देखे चनरमा.
हँसेला हमपे आकाश हो.
दूधवा के जइसन तोहरी सुरतिया,
भरेला मन में उजास हो.

आवेला जब कबो धीरे से नींदिया,
हमके पुकारेला माथे के बिंदिया,
खुल जाला अँखिया त, तोहरी सुरतिया,
लेबे ना देबे सवाँस हो.

अइसे त अँखिया ई का का ना देखलस,
बाकिर कबो तोहरा लेखा ना देखलस.
साँचो बसन्त होला, एह बतिया के अब
करेला मन विश्वास हो.

चनवा के पीछे पीछे मनवो चलेला.
दियवा के संगे संगे तनवो जरेला.
रूपवा के रानी तोहके जतने निहारीं,
बढ़ेला ओतने पियास हो.



बबुआ भइल अब सेयान कि गोदिये नू छोट हो गइल
माई के अंचरा पुरान , अंचरवे में खोट हो गइल

गुटु- गुटु गोदिया में दूध-भात खाइल
मउनी बनल अउरी भुइयाँ लोटाइल ।
नेहिया – दुलरवा के बतिया बेकारे—-
टूटल पिरितिया के डोर कि मन में कचोट हो गइल ।

‘चुलबुल चिरइया’ में बबुआ हेराइल
बोले कि बुढ़िया के मतिये मराइल ।
बाबा के नन्हकी पलनिया उजारे —-
उठल रुपइया के जोर जिनिगिये नू नोट हो गइल ।

भरल-पूरल घरवा में मन खाली-खाली
दियरी जरे पर मने ना दीवाली ।
रतिया त रतिया ई दिनवो अन्हारे —-
डूबल सुरूज भोरे- भोर करेजवे में चोट हो गइल ।
*



{अक्टूबर 5, 2006}  

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 मनोज भावुक

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