बबुआ भइल अब सेयान कि गोदिये नू छोट हो गइल
माई के अंचरा पुरान , अंचरवे में खोट हो गइल
गुटु- गुटु गोदिया में दूध-भात खाइल
मउनी बनल अउरी भुइयाँ लोटाइल ।
नेहिया – दुलरवा के बतिया बेकारे—-
टूटल पिरितिया के डोर कि मन में कचोट हो गइल ।
‘चुलबुल चिरइया’ में बबुआ हेराइल
बोले कि बुढ़िया के मतिये मराइल ।
बाबा के नन्हकी पलनिया उजारे —-
उठल रुपइया के जोर जिनिगिये नू नोट हो गइल ।
भरल-पूरल घरवा में मन खाली-खाली
दियरी जरे पर मने ना दीवाली ।
रतिया त रतिया ई दिनवो अन्हारे —-
डूबल सुरूज भोरे- भोर करेजवे में चोट हो गइल ।
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Regards,
Sunny